Tuesday, October 15, 2013

दसहरा और रावण

१ - दशहरा है
रावणत्व की हार
राम की जीत.

२ - कैसा अधर्म...
रावण घर - घर
पालता कौन?

३ - क्या मरेगा भी
दशानन रावण?
लगता नहीं.

४ - विजy व्यर्थ
रावण भ्रमणशील
क्रियाशील भी.

5 - दीखते राम
रावानी साम्राज्य में
लाचार से, क्यों?

६ - बोलो रावण
तू कब मरेगा?
अभी तो नहीं.

७ - आखिर क्यों?
क्योकि आश्रय मेरा
तेरे अन्दर.

८ - दोष न दो
झांको अंतर्मन में
दुषि तुन हो.

९ - तुम मरोगे
तब भी न मरूँगा
अनुवांशिक.

१० - मैं दशानन
व्यभिचारी नहीं
पूछ सीता से.

११ - टिक पायेगा
समक्ष क्षण भर
भोगी इन्द्र तू.

१२ - अंतर जानो
मैं रानी बनता था
भोग के पूर्व.

१३ - रावण तो था
मर्मज्ञ शास्त्रों का
पतित कैसे?

१४ - शास्त्र मर्मज्ञ
बन जाते रावण
चूकते जब.

१५ - शौर्य नहीं था
पर नारी हरण
प्रतिशोध था.

डॉ. जयप्रकाश तिवारी

2 comments:

  1. अर्थपूर्ण हाइकू ... सामयिक ... बहुत लाजवाब ...

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