Sunday, April 22, 2012

यादें



आज फिर
जाने क्यों
तेरी याद आई
तो बहुत.. आई.

खो गए थे
जो पुराने शब्द.
अपने साथ वे,
भावार्थ लाये
बहुत कुछ
निहितार्थ लाये.

जनता हूँ
खो गयी है
पहचानने की
शक्ति तेरी.

जानकर
यह स्थिति
मेरे अनुराग,
मेरी प्रीति
और भक्ति
और भी
बढ़ गयी है.

9 comments:

  1. बिलकुल ।
    हमारी प्रीत अनुराग हमारी भक्ति सब कुछ बढ़ गई ।। ।।

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  2. खो गए थे
    जो पुराने शब्द.
    अपने साथ वे,
    भावार्थ लाये
    बहुत कुछ
    निहितार्थ लाये.

    बहुत सुंदर रचना...

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  3. यादों का जखीरा आता है तो प्यार बढा देता है ... चाहे वो याद करें न करें ...

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  4. जानकर
    यह स्थिति
    मेरे अनुराग,
    मेरी प्रीति
    और भक्ति
    और भी
    बढ़ गयी है.

    सुंदर प्रस्तुति,

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...:गजल...

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  5. अनुराग, प्रीति और भक्ति में निरंतर वृद्धि होती रहे तभी यादों की सार्थकता है।

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  6. THANKS TO ALL FOR VISIT AND CREATIVE COMMENTS. THANKS ONCE AGAIN.

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  7. यादें ... सुंदर भाव लिए अच्छी रचना

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