Tuesday, February 10, 2015
Friday, January 30, 2015
15 हाइकु: तीस जनवरी
1 - कौन कहता
तीस जनवरी है,
मृत्यु की तिथि ?
2 - अमरता की
उत्सर्ग तिथि बनी
तब से यह ।
3 - हाँ, अमर हैं
मरकर भी आज,
महात्मा गाँधी ।
4 - मरण ही है
यह स्वार्थी जीवन
समझो यदि।
5 - मृत्यु सदृश
है कायर जीवन,
पहचानो तो ।
6 – अमरता तो
निहित उत्सर्ग मे
सर्व विदित ।
7 – अमरता ही
है शाश्वत सौंदर्य
किसी मृत्यु का ।
8 – बता गए हैं
देकर आत्माहुति
गूढ़ रहस्य ।
9 – बड़ा है कौन
स्वार्थी या परमार्थी ?
करो विचार ।
10 – बापू थे तुम !
व्यक्ति या सद्विचार ?
कठिन प्रश्न ।
11 – विश्ववंद्य हो
आज तुम ! बल था,
सत्य अहिंसा ।
12 – सत्य अहिंसा
होते हुये फैली क्यों,
असत, हिंसा?
13 – हे बापू बोलो !
किसने मार डाला,
तेरे विचार ?
14 – बापू संत थे
या थे राजनीतिज्ञ ?
करो विचार ।
15 - कौन है तेरे
सिद्धांतों का हत्यारा?
नहीं बोलोगे
- डॉ. जयप्रकाश तिवारी
Wednesday, January 28, 2015
मैं शलभ हूँ
एक शलभ हूँ मैं
रंगीन तितलियाँ
मन बहलाती हैं
प्यार में जीना
मरना सिखाती हैं
श्वेत तितलियाँ
पवित्रता लती हैं
कर्तव्य-बोध कराती
पथ सुदृढ़ बनाती हैं
तब मुस्काता हूँ मैं
जब आरोप लगता है
दीप बुझाने आया है
हक़ जताने आया है
उन्हें मैं क्या समझाऊं
उन्हें मैं क्या बताऊँ
प्राण तक तो दे दिया
अब कौन साप्रमाण लाऊँ ?
डॉ जयप्रकाश तिवारी
Monday, January 26, 2015
कविता तो मन की बेटी है
कविता तो मन की बेटी है
वह आह वाह में पैदा होती
कविता का दर्द से गहरा नाता
यह कविता दर्द से पैदा होती
...
वह आह वाह में पैदा होती
कविता का दर्द से गहरा नाता
यह कविता दर्द से पैदा होती
...
प्रिय विछोह जब भी होता है
विरह काव्य वह रच जाता है
नहीं मिलते यदि शब्द उसे
पलकों से धीमे से बह जाता
उमंग - तरंग की बात अलग
इसमें भी कविता तैरती है
मन तक ही सीमित नहीं रहती
वह दिक् दिगंत तक फैलाती है
डॉ जयप्रकाश तिवारी
विरह काव्य वह रच जाता है
नहीं मिलते यदि शब्द उसे
पलकों से धीमे से बह जाता
उमंग - तरंग की बात अलग
इसमें भी कविता तैरती है
मन तक ही सीमित नहीं रहती
वह दिक् दिगंत तक फैलाती है
डॉ जयप्रकाश तिवारी
Sunday, January 25, 2015
वह एक स्पर्श
वह शाम ए अवध
का कोई एक पल था
या सुबह ए काशी का
ठीक - ठीक याद नहीं
वह इंडिया गेट था
या हर की पैड़ी
कौन सी थी वो घडी?
अब यह भी याद नहीं,
उस 'एक स्पर्श' के बाद
मुझे कुछ याद न रहा
यदि याद है कुछ तो
वही, वह एक स्पर्श
जिससे सब कुछ
मैंने पा लिया था,
जिसमे सबकुछ
मैंने खो दिया था
अब फिर उस स्पर्श का
संस्पर्श भी नहीं चाहता
वैसा हो भी नहीं सकता
स्वतः स्फूर्त नैसर्गिक था
न सोचा समझा था
न वह बनावटी था।
डॉ जयप्रकाश तिवारी
Saturday, January 24, 2015
माँ शारदे से प्रश्न
माँ!
आज तुम्ही
यह बतलाओ,...
मन की उलझन
तुम सुलझाओ.
मन सोच सोच के
हार गया,
'काव्य' यह मेरे
समझ न आया,
क्या है कविता?
एक उपासना.
कविता साध्य है
या साधना?
कविता लक्ष्य है
या आराधना?
कविता यथार्थ है
या भावना?
कविता बोध है
या संभावना?
कविता अश्रुधार है
या अभिव्यक्ति?
कविता उच्छ्वास है
या आभ्यंतरशक्ति?
कविता प्रणय है या
समर्पण और भक्ति?
कविता कोलाहल है
या पूर्ण संतृप्ति?
कविता हलाहल है
या जीवन का वरदान?
कविता अंतर की शांति है
या अतृप्त अरमान?
कविता सन्देश है,
प्रदर्शन है या अभिमान?
कविता निजत्व का
विलोपन है या पहचान?
कविता उत्साह है
या बहकता एक उमंग?
कविता एक धार है
या उठती हुई तरंग?
कविता एक विकार है
या जीवन का रंग?
कविता भौतिकता है
या एक सत्संग?
कविता.
कृति है मानव की,
फिर मानव है
कृति किसकी?
मानव.
सृष्टि की कविता है;
सृष्टि यह.
कविता है किसकी?
-डॉ. जय प्रकाश तिवारी
एक उपासना.
कविता साध्य है
या साधना?
कविता लक्ष्य है
या आराधना?
कविता यथार्थ है
या भावना?
कविता बोध है
या संभावना?
कविता अश्रुधार है
या अभिव्यक्ति?
कविता उच्छ्वास है
या आभ्यंतरशक्ति?
कविता प्रणय है या
समर्पण और भक्ति?
कविता कोलाहल है
या पूर्ण संतृप्ति?
कविता हलाहल है
या जीवन का वरदान?
कविता अंतर की शांति है
या अतृप्त अरमान?
कविता सन्देश है,
प्रदर्शन है या अभिमान?
कविता निजत्व का
विलोपन है या पहचान?
कविता उत्साह है
या बहकता एक उमंग?
कविता एक धार है
या उठती हुई तरंग?
कविता एक विकार है
या जीवन का रंग?
कविता भौतिकता है
या एक सत्संग?
कविता.
कृति है मानव की,
फिर मानव है
कृति किसकी?
मानव.
सृष्टि की कविता है;
सृष्टि यह.
कविता है किसकी?
-डॉ. जय प्रकाश तिवारी
Thursday, January 22, 2015
क्या दर्द वही जो...
क्या दर्द वही जो छलक पड़ता?
क्या दर्द वही जो लोचन बहता?
क्या वही जिससे मन में गुबार
यदि दर्द यही, तो क्या है वह ?
अंतर में जो घुटता रहता है
आता ही नहीं बाहर को जो
विदग्ध लहर जो जःता है
औ पीकर नयनों का खारा जल
उसे शुष्क किये जो रहता है
डॉ जयप्रकाश तिवारी
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