Thursday, July 26, 2018

कविता का सन्देश

कविता सन्देश
अन्तः का
पहुंचाती है
जन-जन तक
कविता होती है 
विधि सापेक्ष;
विधि निरपेक्ष ,
कुछ उसी तरह
जैसे विधि ही है
सापेक्ष,निरपेक्ष.

काव्य
विधि सम्मत होती
विरोधक भी होती,
यह निरपेक्ष, शाश्वत
शांत - प्रशांत होती,
दैहिक - दैविक-
भौतिक भी होती.
काव्य और
साहित्य प्रायः
आन्दोलन करते
नहीं, कराते है.
ये कभी जनता को
जनार्दन के लिए,
कभी विधि के लिए,
तो कभी जनार्दन को
जगत के लिए भी
प्रेरित किया करते.

काव्य कभी भी
राजनीति करती नहीं,
राजनीतिज्ञों की
कसती नकेल है,
काव्य जगत को
नकारने वाला
यहाँ पास नहीं
नितांत फेल है.
डॉ जयप्रकाश तिवारी

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (28-07-2018) को "ग़ैर की किस्मत अच्छी लगती है" (चर्चा अंक-3046) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
  2. स्नेहिल प्रणाम

    ReplyDelete