Monday, September 4, 2017

कविता - एक पतंग

वेवेदना 
कविता -
एक पतंग है
भाव गगन मे
हो उन्मुक्त
लहराती है,
मस्ती मे करती है
अठखेलियाँ बलखाती है
अनंतता का करके
संस्पर्श धुन मधुर
गुनगुनाती है,
जीवन राग सुनाती है
प्रगति पथ दिखलाती है।
डॉ जयप्रकाश तिवारीके वीर्य से 
संवेदना गर्भ मे पलकर 
भाव शब्द के रूप मे 
सुकोमल हृदय प्रदेश मे 
जन्मती है – ‘कविता’। -दना के वीर्य से 
संवेदना गर्भ मे पलकर 
भाव शब्द के रूप मे 
सुकोमल हृदय प्रदेश मे 
जन्मती है – ‘कविता’। -

1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (05-09-2017) को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ; चर्चामंच 2718 पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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